"हमारी चुप्पी भी सलाम के काबिल होती है... क्योंकि हम बोलते नहीं, बस निभाते हैं—माँ के लिए, देश के लिए, तिरंगे के लिए।" वर्दी के पीछे का इंसान - एक...
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“हमारी चुप्पी भी सलाम के काबिल होती है…
क्योंकि हम बोलते नहीं, बस निभाते हैं—माँ के लिए, देश के लिए, तिरंगे के लिए।”
वर्दी के पीछे का इंसान – एक सैनिक की आत्मा से निकले जज़्बात
लेखक – कृष्ण सिंह (शिक्षा अनुदेशक)
Vardi Ke Picche Ka Insan – Ek Sainik Ki Aatma Se Nikle Jajbaat
Writer – Krishan Singh (Education Instructor)
एक ऐसी किताब है, जो शब्दों में नहीं—जज़्बातों में सांस लेती है। यह उन फौजियों की कहानी है, जिनकी वीरता अक्सर शोर में गूंजती है, लेकिन भावनाएँ खामोशी में दफ़न रह जाती हैं।
यह किताब उन माँओं के बेटों की है जो सरहद पर खड़े हैं, उन बहनों के भाईयों की है जो हर राखी पर लौट नहीं पाते, उन पत्नियों के पति की है जिनकी मुस्कान में आँसुओं का स्वाद छुपा होता है।
यह किताब सिर्फ़ फौजी जीवन का दस्तावेज़ नहीं है—यह एक सैनिक की आत्मा की पुकार है।
हर पन्ना एक सैल्यूट है…
हर शब्द एक श्रद्धांजलि है…
हर जज़्बात एक प्रतिज्ञा है।
क्यों पढ़ें यह किताब?
क्योंकि यह आपको एक सैनिक की खामोश लड़ाई से रु-ब-रु कराएगी।
क्योंकि इसमें वर्दी नहीं, उसमें छिपा इंसान बोलता है।
क्योंकि यह सिर्फ़ देशभक्ति नहीं, संवेदना का दस्तावेज़ है।
कृष्ण सिंह (शिक्षा अनुदेशक) की लेखनी से निकले यह शब्द, एक सैनिक की आत्मा से फूटे जज़्बात हैं—नकली नहीं, जिए गए हैं। अगर आपने कभी किसी सैनिक को सैल्यूट किया है, तो यह किताब उस सैल्यूट की गहराई को समझने के लिए ज़रूरी है।
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