“हर कहानी का एक अंत होता है… पर कुछ कहानियाँ अर्धविराम पर ठहरती हैं — बस एक नई शुरुआत के लिए।”
शैलम — नीलगिरि की शांत वादियों में बसा एक हरा-भरा पर्वतीय नगर, जहाँ प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में खिली है। पर अचानक, इस सौंदर्य के बीच एक नृशंस हत्या का रक्तरंजित अध्याय खुलता है। और फिर शुरू होती है मौत की एक ऐसी शृंखला, जो हर मुस्कुराहट के पीछे छुपे अंधेरे को उजागर करती है।
वेदांत आर्या—एक गम्भीर, संयमी और कर्तव्यनिष्ठ युवक। पेशे से मनोचिकित्सक, जिसने विदेश में चिकित्सा विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त की और वर्षों तक सफल प्रैक्टिस के पश्चात पिता की मृत्यु के बाद माँ के सान्निध्य हेतु स्वदेश लौट आया। बाहर से पूर्ण दिखने वाले उसके जीवन में भीतर एक अधूरापन, एक अनकहा खालीपन घर कर गया है, जिसे न वह समझ पाता है और न ही कोई और।
शर्ली शेट्टी— एक रहस्य में लिपटी हुई, मन की परतों को हर पल बदलती एक अनूठी युवती। नज़रें जैसे खुद में कोई रहस्य समेटे हों। शर्ली, एक साधारण छात्रा और कैफ़े में अंशकालिक कर्मचारी, जो हर दिन खुद को नए रूप में गढ़ती है, जैसे अतीत को भुला देना उसकी आदत हो। वह अपनी सहेली संग इस छोटे शहर में एक सामान्य जीवन जीती है — पर ‘सामान्यता’ से बहुत दूर।
एक अनायास दुर्घटना, दो अजनबियों को एक-दूसरे की ज़िन्दगी से यूँ जोड़ती है। और वहीं से आरंभ होती है एक ऐसी कथा, जो समय, संयोग और संवेदनाओं के धागों में बुनती है खुद को। कभी रहस्य की गहराई, कभी प्रेम की नमी, और कभी अस्तित्व की चुप्पी के बीच—यह कहानी एक अर्धविराम की खाई से निकलकर पूर्णविराम की संपूर्णता तक का सफर तय करती है।
“अर्धविराम” — एक मनोवैज्ञानिक रहस्य-उपन्यास जो प्रेम, पीड़ा, अधूरेपन, स्वयं में लुप्तता जैसे प्रश्नों की परतों को खोलता है।
जब अतीत पीछा न छोड़े और भविष्य धुंधला हो, तब केवल एक राह बचती है — स्वयं की ओर लौटने की।
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